कोरोना महामारी के साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी

In the last ten days, the number of patients with this disease has doubled, despite the safety measures such as the Corona epidemic having spread its foot in the world and early lockdown in India too.

कोरोना महामारी के साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी

                      कोरोना महामारी ने जिस तरह विश्व में अपने पैर पसार लिए हैं तथा भारत में भी जल्दी लॉक डाउन, जैसे सुरक्षा के उपायों के बावजूद, पिछले दस दिनों में ही, इस बीमारी के रोगियों की संख्या दुगनी हो गई है। जो कि बहुत ही चिंताजनक बात है। इतनी कोशिशों के बावजूद भी हम इस बीमारी को बढ़ने से नहीं रोक पा रहे हैं। यह हमें बताता है कि, आनेवाले लंबे समय तक हमें इसके साथ जूझना पड़ेगा। हमें कोरोना के साथ रहने की आदत डालनी होगी।  शायद आगामी दो-तीन वर्षों तक भी इस बीमारी का प्रकोप हमारे देश में बना रह सकता है।

                      कोरोना महामारी को देश से बाहर निकालने में जो प्रमुख अड़चनें हमें आ रही है। उसमें अशिक्षा, जनसंख्या का घनत्व ज्यादा होना, मेडिकल सुविधाओं का अभाव, गलत धार्मिक मान्यताएं, गरीबी, ऐसे से बहुत सारे कारण है, जो हमें इस बात का संकेत देते हैं कि आनेवाले समय में यह महामारी देश में फैलती ही रहेगी।  इसका समग्र उन्मूलन होता दिखाई नहीं दे रहा है। अतः अब आवश्यकता है, कि हमें इसके साथ, जीने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने की।

                        पिछले एक महीने से टीवी पर जिस तरह की खबरें आ रही है। वह बेहद ही भयावक एवं डरावनी है। कई लोगों ने देश में टीवी देखना बंद कर दिया है। जैसे तैसे पूरा देश, सोशल मीडिया पर अपना समय गुजार रहा है। उस पर भी अफवाहों का खतरा बना हुआ है। कई लोग बिना किसी बात को सोचे-समझे मैसेजेस को फॉरवर्ड करते रहते हैं। उनके लिए यह मनोरंजन का एकमात्र साधन रह गया है। लोग यह नहीं समझते कि इस तरह के गलत मैसेज को आगे भेजने से किस तरह का नुकसान समाज को हो रहा है।

                      अमेरिका, इटली, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, चीन मैं  मेडिकल सुविधाओं की उन्नत व्यवस्था होने के बावजूद वे देश कोरोना महामारी को अभी तक कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। कुछ अर्थों में इन देशों की कोरोनावायरस की दशा हमारे देश से भी ज्यादा खराब है। अतः शायद अब हमें इस महामारी के साथ जीने के लिए अपने आपको तैयार करना पड़ेगा।

                      आने वाले समय में हमारे सोचने समझने एवं जीने के तरीके में पूर्णतया परिवर्तन आ जाएगा। अब हमें हमारे हर सामाजिक कार्य, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ इसका पालन करते हुए, पूरा करना होगा। हमारी मान्यताएं एवं सामाजिक रीति-रिवाजों को भी अब बदलने का समय आ गया। लॉक डाउन में हम जिस तरह जीवन बिता रहे हैं। कमोबेश उसी तरह के जीवन की आदत डालनी पड़ेगी। हमें हमारे घर,ऑफिस में सतही सैनिटेशन की पूरी व्यवस्था करनी पड़ेगी। सामाजिक कार्यों में कम से कम लोग आवे। इसका ध्यान रखना पड़ेगा। जो बहुत नजदीक के रिश्तेदार हैं। उन लोगों के साथ ही सामाजिक कार्यो को संपन्न किया जाएगा। दिखावे की जिंदगी से हमें दूर रहना पड़ेगा। हर समय सभी को  मास्क धारण करने की आदत डालनी पड़ेगी। सभी जगह सफाई का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा।

                     आने वाले समय में सरकार इस लॉक डाउन से नागरिकों को चरणबद्ध तरीके से ही छूट प्रदान करेगी । जहां तक संभव हो सके, हमें वर्क फ्रॉम होम करने की आदत डालनी पड़ेगी। मार्केट में भी अधिकतर लोग, एक दूसरे से उचित दूरी बनाए रखें, इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा। आने वाले समय में दिहाड़ी मजदूरों, गरीबों और रोज कामकाज कर जीवन व्यापन करने वालों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार को समाज के इस तबके का विशेष ख्याल रखना पड़ेगा। हमारे देश में गरीब लोगों की संख्या बहुत ज्यादा होने के कारण आने वाले समय में यहीं तबका सबसे ज्यादा परेशान हो सकता है। अतः इसके लिए सरकार को विशेष सुविधाएं एवं रियायतें प्रदान करनी पड़ेगी। दुनिया में पिछले कई वर्षों से, हर दस साल में एक न एक महामारी उभर कर आती है। किंतु इस बार की महामारी कोविड-19 का दूरगामी परिणाम हमारे सभी के जीवन पर पड़ेगा। अतः हमें अपने जीवनशैली, सोच, सामाजिक व्यवस्था, इन सब में उचित परिवर्तन करना पड़ेगा।

दीनदयाल मुरारका.